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मानसून सत्र के पहले प्रधानमंत्री का सम्बोधन,कही बड़ी बात

लखनऊ डेस्क:

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संसद का मानसून सत्र Monsoon session आज यानी दिन मंगलवार से  शुरू होने वाला है, साथ ही यह सत्र 12 अगस्त को समाप्त होगा। सत्र के दौरान, केंद्र सरकार कई विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी और इसके विधायी एजेंडे में 32 विधेयक पारित होने के लिए शामिल हैं – जिनमें से 14 तैयार हैं। आपको बताते चले संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ-साथ आज देश के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव भी होने हैं ,उसी के साथ ही हमारे देश के वर्तमान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का कार्यकाल 26 जुलाई को समाप्त हो जाएगा।

 नए  सत्र की शुरुआत में प्रधानमंत्री का सम्बोधन

प्रधानमंत्री ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत में संसद से अपनी भावनाओं को सम्बोधित किया ,उन्होंने अपने भाषण में कहा कि ये सत्र मौसम से तो जुड़ा हुआ है ही, साथ ही अभी दिल्ली में भी वर्षा होनी प्रारम्भ हो गयी हैं जिसके बाद उन्होंने आज़ादी के अमृत महोत्त्सव को याद करते हुए कहा कि ये काल खंड बहुत ही आवश्यक हैं यह आज़ादी के अमृत महोत्त्सव का काल खंड हैं साथ ही उन्होंने इस सत्र को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा की सत्र की शुरुआत में ही देश के नए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव भी हो रहे हैं जिसके बाद देश को नए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का नेतृत्व भी प्राप्त हो जाएगा।

संसद भवन को तीर्थ का दिया दर्जा

मानसून के पहले सत्र में देश के प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में संसद भवन को संवाद का एक प्रबल माध्यम बताया, और सदन को तीर्थ क्षेत्र का दर्जा भी दिया, जहां खुले मन से संवाद हो, किसी भी प्रकार के निति और निर्णयों के लिए जरुरी हो तो वाद-विवाद भी हो, विश्लेषण भी हो ताकि निर्णयों में एक सकारात्मक योगदान किया जा सकें साथ ही उन्होंने सभी सांसदों को यह भी निवेदन किया की गहन चिंतनमनं कर अपना सहयोग दे।

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