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बलरामपुरः मदरसा प्रबंधक व प्रधानाचार्य रजिस्टर पर बना रहे हस्ताक्षर, 7 वर्षों से शिक्षक और लिपिक की हो रही फर्जी हाजिरी, उठ रहा वेतन!

बलरामपुरः एक तरफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र छात्राओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर उनके हाथों को हुनरमंद बनाने की कोशिश कर रही है। उन्हें धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा से जोड़कर समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का थाप दे रही है। वहीं, दूसरी तरफ मदरसो शिक्षकों और प्रबंधकीय समितियों की मनमानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। तुलसीपुर नगर के अनुदानित मदरसा दारुल उलूम अतीकिया में छात्र तो मिलते हैं, लेकिन अधिकांश शिक्षक स्कूल से गायब रहते हैं। शिक्षकों के साथ ही लिपिक व अन्य कार्यों में लगे चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी आए दिन मदरसे से गायब रहते हैं, जिससे छात्र छात्राओं के पठन-पाठन की व्यवस्था में कहीं ना कहीं समस्या आती है।

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2 शिक्षक, दो कर्मचारी बराबर रहते हैं मदरसे से नदारद

हाईस्कूल तक संचालित मदरसे में शिक्षक अमितेंद्र श्रीवास्तव की नियुक्ति 2015 में हुई थी। वह नियुक्त से अब तक मदरसे में नहीं आ रहे हैं। कनिष्ठ सहायक (दफ्तरी) पद पर तैनात तहरीर हसन की नियुक्ति 2016 में हुई थी। वह भी नियुक्ति के बाद से अब तक स्कूल नहीं आए। इसके अलावा एक अन्य शिक्षक व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी महज हाजरी बनाकर गायब हो जाया करते हैं। खास बात यह है कि प्रबंधक व प्रधानाचार्य की मेहरबानी से इनका मानदेय भुगतान बराबर हो रहा है।

शिक्षक और लिपिक बिना काम किए 7 वर्षों से उठा रहे हैं वेतन

आपको बता दें कि तुलसीपुर के जरवा मार्ग स्थित मदरसा दारुल उलूम अतीकिया में हाईस्कूल तक पढ़ाई होती है। मदरसे में 300 से अधिक छात्र-छात्राओं का नामांकन बताया जाता है। लेकिन हाईस्कूल में ही 38 छात्र बताए जाते हैं। इनको पढ़ाने लिखाने के लिए मदरसे में प्रधानाचार्य, 12 शिक्षक, एक लिपिक और एक चपरासी की तैनाती है।

यहां शिक्षक अमितेंद्र श्रीवास्तव की नियुक्ति एक जनवरी 2015 को आलिया वैकल्पिक विषय के लिए हुई थी। वहीं मदरसे में एकमात्र लिपिक तहरीर हसन को 27 जनवरी 2016 को नियुक्ति मिली। तब से ये दोनों मदरसा आए बगैर ही घर बैठे वेतन उठा रहे हैं। बताया जाता है कि वैकल्पिक शिक्षक मदरसा बोर्ड लखनऊ में तैनात रहे एक पूर्व वित्त एवम् लेखा अधिकारी विनय कुमार श्रीवास्तव के सगे छोटे भाई हैं।

जबकि यहां तैनात लिपिक, मदरसा बोर्ड लखनऊ में तैनात एक लिपिक अनवार अहमद के रिश्तेदार हैं। शिक्षक की नियुक्ति को 7 वर्ष पूरे हो चुके हैं, जबकि लिपिक की नियुक्ति को 6 वर्ष पूरे हो चुके हैं। तब से लेकर आज तक इन्होंने विद्यालय का चेहरा तक नहीं देखा है।

लिपिक और शिक्षक को नहीं पहचानते छात्र

वहीं मदरसा छात्रों को इस बात की जानकारी नहीं है, कि कौन- कौन से शिक्षक यहां नियुक्त हैं। छात्रों को तो छोड़िए, यहां तैनात शिक्षक भी अपने साथी कर्मचारियों को ना तो पहचानते हैं, और ना ही उन्होंने उनका कभी चेहरा देखा है। बस नाम ही सुना है। हैरानी की बात यह है कि गायब रहने वाले शिक्षक और लिपिक का हस्ताक्षर उपस्थिति पंजिका में बराबर बना रहता है। ऐसे में यहाँ पढ़ने वाले नौनिहालों का भविष्य अंधकार मय ही नजर आता है।

शिकायत के बाद भी नहीं कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक मदरसे में शिक्षकों की मनमानी की शिकायतों के बाद भी जिले के आला अधिकारी गंभीर दिखाई नहीं देते हैं। इससे बिना कार्य वेतन उठाने की परंपरा पर अंकुश नहीं लग रहा है। लाल चौराहा निवासी उस्मान अंसारी ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर शिक्षकों और लिपिक की मनमानी की शिकायत की थी। साथ ही प्रबंधक और प्रधानाचार्य पर फर्जी हस्ताक्षर बनाने का आरोप लगाया था। लेकिन अभी तक जिलाधिकारी और विभागीय अधिकारियों द्वारा किसी भी तरह की जांच कमेटी का गठन तक नहीं किया जा सका है।

आपको बता दें कि मदरसा दारुल उलूम के प्रधानाचार्य मुज्जफर हुसैन अपने वीडियो बयान में कहते हैं कि हमारे यहां ऐसा कोई अध्यापक नहीं है, जो रोजाना ना आता हो। हमारे यहां सभी अध्यापक रोजाना आते हैं और बच्चों को पठन-पाठन का कार्य करवाते हैं। आप जिस शिक्षक और लिपिक की बात कर रहे हैं। वह दोनों आज छुट्टी पर हैं। जो शिकायत की गई है। वह क्यों की गई, इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।

जिसको लेकर प्रभारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशीष द्विवेदी ने बताया कि एक व्यक्ति द्वारा अनुदानित मदरसा दारूल उलूम अतिकिया में शिक्षक और कर्मियों के ना आने की शिकयत की गई है। उक्त शिकायत की जांच कराई जाएगी। आरोप सही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी ने अपनी बात कह कर पल्ला झाड़ लिया लेकिन यह जांच कब होगी। इसका कोई अता पता नहीं है। यहां पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को वैकल्पिक विषयों की शिक्षा कब और कैसे मिलेगी, इसके बारे कोई सोचने वाला नहीं है।

बताते चलें कि सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि शिक्षक अमितेंद्र श्रीवास्तव और लिपिक तहरीर हसन के आने पर प्रबंधकीय समिति और प्रधानाचार्य द्वारा विगत 7 वर्षों का उपस्थिति रजिस्टर बदल दिया जाएगा और सभी शिक्षक पिछले 7 वर्षों का हस्ताक्षर करेंगे, जिससे जांच में किसी तरह की कोई कमी उजागर ना होने पाए और इन दोनों रसूखदार शिक्षकों का करामात यूं ही बदस्तूर जारी रहे।

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