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ऐतिहासिक लम्हा : 383 दिन बाद घर पहुंचे राकेश टिकैत, परिवार की आँखें ख़ुशी से हुईं नम

मुजफ्फरनगर/लखनऊ : पिछले एक साल से गाज़ीपुर बॉर्डर (Gazipur border) पर चल रही घमासान अब थम गई है। किसान आखिरकार अपने-अपने घरों के रवाना हो गए हैं। दिल्ली में गाज़ीपुर बॉर्डर पर बीच हाइवे पर जहां किसानों के तंबू दिखाई देते थे अब वहां एक बार फिर से गाड़ियां सरपट दौड़ने लगी हैं। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) भी गुरूवार रात करीब 1:00 बजे सिसौली की पट्टी चौधरान स्थित अपने आवास पर पहुंचे।

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घर पहुंचे राकेश टिकैत

टिकैत जब अपने परिजनों से मिले तो वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया। बड़ी बहन ओमबीरी (Ombiri) ने राकेश टिकैत का तिलक किया। इन सब से पहले राकेश टिकैत किसान भवन गए थे। जहां उन्होंने अपने पिता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को श्रद्धांजलि अर्पित की।

383 दिन बाद घर पहुंचे टिकैत

किसान आंदोलन का राकेश टिकैत सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं। 383 दिन बाद उनकी घर वापसी पर सोरम, हड़ौली और सिसौली में किसानों ने टिकैत पर फूल बरसाए। । ऐतिहासिक चौपाल पर सुबह से ही बेसब्री से किसान स्वागत के लिए खड़े थे। आंदोलन की कामयाबी का श्रेय किसानों ने टिकैत बंधुओं को दिया।

घर पहुंचे राकेश टिकैत

जब तक कानून वापस नहीं होंगे, घर नहीं लौटेंगे – राकेश टिकैत

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने आंदोलन के दौरान कहा था कि जब तक कानून वापस नहीं होंगे, वह घर नहीं लौटेंगे। इस दौरान वह मुजफ्फरनगर तो पहुंचे, लेकिन अपने घर नहीं गए थे। महापंचायत के अलावा शिव मूर्ति पर भी घंटा चढ़ाया था। लेकिन जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की बात कही राकेश टिकैत ने भी अपने आशियाने की ओर कदम बढ़ा दिए।

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