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Supreme Court: ‘मियां-तियां’ और ‘पाकिस्तानी’ कहने से नहीं बनता धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अपराध

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय से जुड़ी एक टिप्पणी पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि किसी को ‘मियां-तियां’ या ‘पाकिस्तानी’ कहने से भले ही अपमानजनक लगे, लेकिन यह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 298 के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा अपराध नहीं बनता। इस फैसले में एक व्यक्ति को तीन गंभीर आरोपों से बरी कर दिया गया।

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यह मामला एक सरकारी कर्मचारी पर ‘पाकिस्तानी’ कहने का था, जब वह अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा था। मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसके धर्म का हवाला देते हुए उसे अपमानित किया और उसके काम को रोकने के लिए बल का प्रयोग किया।

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए आरोपी को बरी कर दिया और कहा कि धारा 353 (लोक सेवक पर हमला या बल प्रयोग) के तहत आरोपों को बनाए रखने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं। अदालत ने यह भी कहा कि हालांकि ‘मियां-तियां’ और ‘पाकिस्तानी’ शब्दों का उपयोग गलत था, लेकिन यह धार्मिक भावनाओं को आहत करने के अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

यह फैसला भारतीय दंड संहिता के तहत धार्मिक भेदभाव से जुड़ी संवेदनशीलता को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रस्तुत करता है।

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