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क्या एफआईआर दर्ज होने से पहले मांगी जा सकती है अग्रिम जमानत? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत की शर्तों को लेकर स्थिति अब स्पष्ट कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति द्वारा अग्रिम जमानत की मांग उस स्थिति में की जा सकती है अगर उसे उचित विश्वास हो कि उसे गिरफ्तार किया जा सकता है, भले ही उसके खिलाफ कथित गैर जमानती अपराध के संबंध में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई हो।

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न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने यह टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ आवेदक को अग्रिम जमानत देने की प्रार्थना के साथ दायर अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा, हालांकि कानून किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी की संभावना होने पर किसी प्रासंगिक सामग्री के अभाव में केवल अस्पष्ट दावों पर अग्रिम जमानत लेने की अनुमति नहीं देता है, लेकिन उचित प्रमाण प्रस्तुत करने पर आवेदक को जमानत मिल सकती है। कोर्ट ने जावेद अहमद को जमानत देने से इनकार करते हुए उक्त शर्तें स्पष्ट कीं।

 

दरअसल याची को यह संदेह था कि एक कथित झूठे मामले में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद किसी भी समय पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। ऐसे में उसने गिरफ्तारी की आशंका के साथ गिरफ्तारी पूर्व जमानत की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था।

 

मामले के अनुसार साहब लाल (विपक्षी) ने उसे घर के निर्माण के लिए आर्थिक मदद के रूप में 17,50,000/- रुपये दिए थे और 5 जनवरी 2023 को विपक्षी ने इस राशि का भुगतान करने के लिए कहा था। लेकिन 20 जनवरी तक बकाया राशि न देने की स्थिति में कथित तौर पर अपशब्द कहने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में याची को झूठे और मनगढ़ंत केस में फंसाने की संभावना के आधार पर याची ने अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की।

 

इस पर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आवेदक को यह साबित करना होगा कि उसे एक गैर जमानती अपराध में गिरफ्तार किया जा सकता है। मौजूदा मामले में याची की ओर से गिरफ्तारी की आशंका अच्छी तरह से स्थापित नहीं की गई है और वह यह भी सिद्ध करने में सफल नहीं हुआ कि उसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने का उचित विश्वास कैसे है।

 

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अब तक साहब लाल द्वारा याची को दिए गए पैसों की वसूली के संबंध में किसी भी प्राधिकरण में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है| मुख्य रूप से कोर्ट ने कहा कि याची के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अब तक विपक्षी ने किसी भी अदालत के समक्ष कोई आवेदन भी दाखिल नहीं किया है, इसलिए गिरफ्तार किए जाने का कोई उचित विश्वास मौजूद नहीं है।

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