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मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक मोहन यादव नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।

मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक दल के नेता मोहन यादव ने बुधवार को प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। यादव ने 1982 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से राजनीति में कदम रखा। 41 साल पहले छात्रसंघ राजनीति से शुरू हुआ सफर अब राज्य के सबसे ताकतवर पद तक पहुंच गया। ये किस्से बताते हैं कि कितने संघर्ष के बाद उन्होंने ये मकाम पाया है। किस तरह 41 साल तक पार्टी संगठन में अलग-अलग पदों से होते हुए यादव मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे हैं।

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2021 में मोहन उस समय विवाद का हिस्सा रहे, जब उन्‍होने उच्च शिक्षा विभाग के एक कानून को लेकर बयान दिया था. कानून में कहा गया था कि जिस छात्र के नाम आपराधिक रिकॉर्ड है, उसे कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. हालांकि बाद में यह कानून का वापस ले लिया. इस कानून को लेकर मोहन ने कहा था कि अगर कोई नेता लोकसभा और विधानसभा में चुनाव लड़ सकता है तो एक छात्र को कॉलेज में प्रवेश क्यों नहीं दिया जा सकता है.

 

 

 

ऐसे की राजनीति की शुरुआत
कैबिनेट मंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने माधव विज्ञान महाविद्यालय से पढ़ाई की है. साथ ही यही वो समय था जब वह राजनीति के गुण सीख रहे थे और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने लगे. जिसके बाद मोहन को पहली बार 1982 में छात्र संघ का सह सचिव चुना गया.

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