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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पादरी के शव को दफनाने के लिए छत्तीसगढ़ में निर्दिष्ट स्थान पर अनुमति

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी से छत्तीसगढ़ के शवगृह में रखे गए पादरी के शव को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कोर्ट ने इस शव को दफनाने के लिए छत्तीसगढ़ के छिंदवाड़ा गांव से 20 किलोमीटर दूर निर्दिष्ट स्थान पर दफनाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट की खंडित बेंच ने इस मामले में दो अलग-अलग राय व्यक्त की। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि शव को परिवार की निजी कृषि भूमि पर दफनाया जाना चाहिए, जबकि जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने इसे राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अन्य स्थान पर दफनाने की बात की।

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कोर्ट ने कहा कि मामले में सुरक्षा के दृष्टिकोण से राज्य सरकार को पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। साथ ही, बेंच ने मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आदेश पारित किया और यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले को बड़ी बेंच को नहीं भेजेगी।

पादरी के बेटे की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 22 जनवरी को उम्मीद जताई थी कि शव का सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार किया जाएगा और मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जाएगा। याचिकाकर्ता ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पादरी के शव को कब्रिस्तान में दफनाने के अनुरोध को खारिज किया गया था।

मामले में यह भी सामने आया था कि गांव के कुछ ग्रामीणों ने शव को दफनाने का विरोध किया था और परिवार को धमकी दी थी कि वे शव को दफनाने पर गंभीर परिणाम भुगत सकते हैं। इस मामले में पुलिस को भी में हस्तक्षेप करना पड़ा था, जब ग्रामीणों ने शव को गांव के बाहर ले जाने का दबाव बनाया।

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