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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने विशेषाधिकार का प्रयोग कर दिया तलाक, कहा- ‘शादी टूटने का मतलब जीवन का अंत नहीं’

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पति-पत्नी के बीच विवाद का समाधान करते हुए तलाक को मंजूरी दी और कहा कि शादी का टूटना जीवन का अंत नहीं होता। कोर्ट ने इस मामले में विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए 17 केस खत्म कर दिए और दम्पति को भविष्य की ओर सकारात्मक रूप से देखने की सलाह दी।

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न्यायमूर्ति अभय ओका की अगुवाई में पीठ ने मई 2020 में हुई शादी को समाप्त कर दिया। पति-पत्नी के बीच उत्पीड़न और अन्य विवादों को लेकर 17 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें प्रताड़ना भी शामिल थी। कोर्ट ने इन सभी मामलों को समाप्त करते हुए दोनों पक्षों को अपने जीवन में आगे बढ़ने का सुझाव दिया।

कोर्ट ने कहा, “दोनों पक्ष युवा हैं और शादी के विफल होने का मतलब यह नहीं कि उनका जीवन खत्म हो गया। उन्हें अपनी नई राह की ओर बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।”

आम तौर पर तलाक के मामलों की सुनवाई फैमिली कोर्ट में होती है, जहां कम से कम छह महीने का समय लग सकता है। लेकिन इस विशेष मामले में कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए त्वरित निर्णय लिया।

महिला ने शादी के एक साल के भीतर ही उत्पीड़न का आरोप लगाया और अपने ससुराल को छोड़ दिया। अब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से अपील की है कि वे शांति से रहें और अपने भविष्य के लिए एक नया अध्याय शुरू करें।

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