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नोटबंदी: 5 जजों की राय में एक ने बताया गैरकानूनी, जानें ऐसा क्यों ?

सुप्रीम कोर्ट ने आज नोटबंदी (Supreme Court today demonetisation) पर एक बड़ा फैसला सुनाया है। केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले पर पांच जजों की संविधान पीठ (Constitution bench of five judges on note ban decision) ने सोमवार को 4-1 के बहुमत से ये फैसला सुनाया गया है। हालांकि संविधान पीठ में शामिल एक जज ने नोटबंदी के फैसले को गैरकानूनी बताया है।

58 याचिकाओं को किया खारिज

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आपको बता दें कि, इस मामले में बेंच ने कहा है 500 और 1000 के नोट बंद करने की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। बेंच ने साफ़-साफ़ ये भी कहा आर्थिक फैसले को पलटा नहीं जा सकता है। साल 2016 में लिया गया केंद्र सरकार का नोटबंदी का फैसला सही था, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नोटबंदी के फैसले को सही करार देते हुए इसके खिलाफ दायर 58 याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है।

चार जजों की राय से अलग लिखा फैसला

जानकारी के मुताबिक, पांच जजों की संविधान पीठ में जस्टिस एस अब्दुल नजीर, बीआर गवई, एएस बोपन्ना, वी रामसुब्रमण्यम और जस्टिस बीवी नागरत्ना शामिल थे। इनमें से जस्टिस बीवी नागरत्ना ने बाकी चार जजों की राय से अलग फैसला लिखा। इस सिलसिले में उन्होंने कहा कि नोटबंदी का फैसला गैरकानूनी था। इसे गजट नोटिफिकेशन की जगह कानून के जरिए लिया जाना चाहिए था।

अचानक नोटबंदी का किया था ऐलान

केंद्र सरकार ने 8 नवंबर, 2016 को रात 8 बजे अचानक नोटबंदी का ऐलान किया था। अदालत ने केंद्र और RBI से 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले पर 9 नवंबर को होने वाली सुनवाई से पहले व्यापक हलफनामा दाखिल करने को कहा था।

 

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