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नए संसद भवन का उद्घाटन कल, 21 संत चेन्नई से दिल्ली के लिए होंगे रवाना !

New Parliament Building ;28 मई दिन रविवार को देश में नए संसद भवन का उद्घाटन होने जा रहा है। यह नया भवन देश की विविध संस्कृति से जुड़ा हुआ है ।और इसके निर्माण में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आयातित सामग्री का उपयोग किया गया है। भवन की फ़्लोरिंग त्रिपुरा के बांस से की गई है, जबकि भवन के लिए सागौन की लकड़ी नागपुर से आई है। इसके अलावा, लोकसभा-राज्यसभा की विशाल दीवार और संसद के बाहर लगे अशोक चक्र को इंदौर से आयातित किया गया तो वही इनॉगरेशन कार्यक्रम में शामिल होने और प्रधानमंत्री मोदी जी को सुनहरे रंग के राजदंड (सेंगोल) की भेंट करने के लिए, चेन्नई के धर्मपुरम अधीनस्थ 21 संत चेन्नई से इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक ये संत प्रधानमंत्री मोदी को देने के लिए एक विशेष तोहफा भी ला रहे है !

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बिहार के CM की नए संसद भवन पर राय

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि उनकी राय में नए संसद भवन की आवश्यकता क्यों थी। उन्होंने कहा कि पुरानी संसद इमारत ऐतिहासिक महत्वपूर्ण थी, और उन्होंने कई बार कहा है कि सत्ता में बैठे लोग देश के इतिहास को बदल सकते हैं। इस परिस्थिति में, वे नीति आयोग की बैठक में शामिल होने और कल संसद के इनॉगरेशन समारोह में शामिल होने का कोई मतलब नहीं मानते हैं।

 

75 रुपये का सिक्का जारी होगा

प्रधानमंत्री मोदी नए संसद भवन के इनॉगरेशन के अवसर पर 75 रुपये का सिक्का जारी करेंगे। सिक्के पर एक ओर अशोक स्तंभ का सिंह होगा, जिस पर ‘सत्यमेव जयते’ लिखा होगा। साथ ही, सिक्के की एक ओर देवनागरी लिपि में ‘भारत’ और दूसरी ओर अंग्रेजी में ‘इंडिया’ शब्द लिखा होगा नए भवन में त्रिपुरा के बांस से बनी फ़्लोरिंग और दमन-दीव से बनी सीलिंग की संरचना होगी।

 

नए संसद भवन में देश के हर क्षेत्र की विविधता की झलक देखने का अवसर मिलेगा। इस भवन की फ़्लोरिंग त्रिपुरा के बांस से की गई है। इसके साथ ही, कालीन मिर्जापुर संसद भवन का हिस्सा है। भवन की लाल-सफेद सैंडस्टोन राजस्थान के सरमथुरा ख़ास किए गए हैं। इसके अलावा, रेत निर्माण के लिए हरियाणा के चरखी दादरी से लाई गई है और भवन के लिए सागौन लकड़ी नागपुर से आई है।

 

 

भवन के अंदर के केसरिया हरा पत्थर उदयपुर से, लाल ग्रेनाइट अजमेर के पास लाखा से और सफेद संगमरमर राजस्थान के अंबाजी से आए हैं। लोकसभा और राज्यसभा की सीलिंग में स्टील की संरचना दमन-दीव से मंगाई गई है। इसके साथ ही, संसद में लगा गया फर्नीचर मुंबई में तैयार किया गया है। पत्थर की जाली का काम राजस्थान के राजनगर और नोएडा से कराया गया है।संसद के बाहर लगा अशोक चक्र इंदौर का प्रतीक चिह्न अशोक स्तंभ के लिए सामग्री महाराष्ट्र के औरंगाबाद और राजस्थान के जयपुर से बुलाई गई। वहीं, लोकसभा और राज्यसभा की विशाल दीवारों पर और संसद के बाहर अशोक चक्र की प्रतीमुर्ति इंदौर से मंगवाई गई है।

 

 

 

फ्लाई ऐश ईंटें हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आई हैं, पीतल के काम और सीमेंट के ट्रेंच अहमदाबाद से लाए गए हैं। नई संसद के पहले वीडियो जारी हो चुका है और नई संसद के इनॉगरेशन में अब एक दिन बचा है। लोकसभा और राज्यसभा की सीट के पीछे विशाल अशोक चक्र हैं । लोकसभा के कालीन पर मोरपंख की डिजाइन हैं। ऐसी ही प्रतीकात्मक डिजाइन सदस्यों के डेस्क पर बनी है। हर डेस्क पर स्क्रीन लगी हैं!

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